#तृष्णा_की_बाढ़_से_पार_जाना

💥#लेणी_संवर्धनातुन_धम्म_संवर्धन💥
एवं मे सुत्तं…..ऐसा मैंने सुना- एक समय तथागत गौतम बुद्ध श्रावस्ती में अनाथपिंडिक के द्वारा बनवाए गए जेतवन में विहार कर रहे थे। तब कोई देवता रात बीतने पर अपनी आभा से सारे जेतवन विहार को चमकाते हुए जहां तथागत थे वहां आया और तथागत का अभिवादन कर एक ओर खड़ा हो गया।एक ओर खड़ा हो वह देवता ने तथागत से पुछा- भन्ते ! बाढ़ को आपने कैसे पार किया?आवुस ! मैंने बिना रूकते और बिना कोशिश करते बाढ़ को पार किया। तथागत ने उत्तर दिया।यह बाढ़ क्या है?यह तृष्णा की बाढ़ होती है।तृष्णा की बाढ़ के कितने प्रकार है?तृष्णा की बाढ़ के चार प्रकार है।कौन से चार प्रकार है?१. काम की बाढ़२. भव की बाढ़३. मिथ्या दृष्टि की बाढ़४. अविद्या की बाढ़
💥१.#काम_की_बाढ़—————पांच काम गुणों के प्रति तृष्णा का होना काम की बाढ़ है। पांच काम गुण है- रुप, शब्द, गन्ध, रस और स्पर्श।
💥२.#भव_की_बाढ़—————–रुप और अरुप के प्रति तृष्णा का होना भव की बाढ़ है।
💥३.#मिथ्या_दृष्टि_की_बाढ़———————–मिथ्या धारणाएं हैं, उन्हें मिथ्या दृष्टि की बाढ़ कहते हैं।
💥४.#अविद्या_की_बाढ़——————-चार अरिय सत्यों के झान का न होना अविद्या की बाढ़ है।तृष्णा क्या है?जीवन निर्वाह के लिए आवश्यकता की चाह को पूरा करने के लिए मन में जो तीव्र उत्तेजना पैदा होने लगती है, उसी का नाम तृष्णा है। आसक्ति ही तृष्णा है।पंचवग्गिय परिव्राजको को संबोधित करते हुए बुद्ध ने कहा-
🍂#यायं_तण्हा_पोनोभाविका_नन्दिरागसहगता_तत्र#तत्राभिनन्दिनी, #सेय्य_थीदं#कामतण्हा_भवतण्हा, #विभवतण्हा ।”🍃
☸️ #धम्मचक्क_पवत्तन_सुत्तअर्थात-भिक्षुओं ! यह दुःख -समुदय अरिय सत्य है- यह जो कि फिर जन्म कराने वाली, प्रीति और राग से युक्त, उत्पन्न हुए स्थानों से अभिनन्दन कराने वाली तृष्णा है जैसे कि -१. #काम_तृष्णा
२. #भव_तृष्णा
३. #विभव_तृष्णा
तथागत ने कहा-आवुस ! यदि कहीं रुकने लगता तो डूब जाता, यदि कोशिश करने लगता, तो वह जाता।आवुस ! इसी तरह मैंने बिना रुकते और बिना कोशिश करते बाढ़ को पार किया।
☸️#नमो_बुद्धाय🙏🏻🙏🏻🙏🏻
Ref: ☸️#ओधतरन_सुत्त: #संयुक्त_निकाय#धम्मचक्क_पवत्तन_सुत्त
सुखी निदुक्खा, निरोगा होन्तु
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लेखन :- लेणी संवर्धक मुकेश जाधव

Jay Bhim Namo Buddhay
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